( दीपक कुमार त्यागी) सफल जीवन में गुरु का अनमोल योगदान (लेख )

Posted at : 2019-09-05 07:03:23

भारत के स्वर्णिम इतिहास में गुरु-शिष्य परम्परा के लिए अपना सर्वस्व दाव पर लगा देने वाले बहुत सारे गुरु व शिष्य रहे हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य की महान परम्परा के अन्तर्गत गुरु (शिक्षक) अपने शिष्य को शिक्षा देता है या किसी अन्य विद्या में निपुण करता है बाद में वही शिष्य गुरु के रूप में दूसरों को शिक्षा देता है। यही क्रम लगातार चलता रहता है। यह परम्परा सनातन धर्म की सभी धाराओं में मिलती है। गुरु-शिष्य की यह परम्परा ज्ञान के किसी भी क्षेत्र में हो सकती है। भारतीय संस्कृति में गुरु का बहुत अधिक महत्व है। 'गु' शब्द का अर्थ है अंधकार (अज्ञान) और 'रु' शब्द का अर्थ है प्रकाश ज्ञान। मतलब अज्ञान को नष्ट करने वाला जो ब्रह्म रूप प्रकाश है, वह गुरु है। हमारे देश में प्राचीन काल से ही आश्रमों में गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह कुशलतापूर्वक होता रहा है। भारतीय संस्कृति में गुरु को अत्यधिक सम्मानित स्थान प्राप्त है। भारतीय इतिहास पर नज़र डाले तो उसमें गुरु की भूमिका समाज को सुधार की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शक के रूप में होने के साथ क्रान्ति को दिशा दिखाने वाली भी रही है। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है, जो कि निम्न श्लोक से स्पष्ट हो जाता है। “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर: । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः” प्राचीन भारतीय संस्कृति में गुरु और शिष्य के संबंधों का आधार था गुरु का ज्ञान, मौलिकता और नैतिक बल, उनका शिष्यों के प्रति स्नेह भाव, तथा ज्ञान बांटने का निःस्वार्थ भाव। जो भावना उस समय के हर शिक्षक में होती थी। वहीं उस समय के शिष्य भी गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा, गुरु की क्षमता में पूर्ण विश्वास तथा गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण एवं आज्ञाकारी होते थे, उसके अनुसार अनुशासन को शिष्य का सबसे बड़ा महत्वपूर्ण गुण माना गया है। आज के आधुनिक समय में किसी भी कामयाब व्यक्ति के जीवन पर नजर डाले, तो यह स्पष्ट नजर आता है कि उसको सफलता की बुलंदियों पर पहुचाने में उसके शिक्षक का अनमोल योगदान रहा है। जीवन में एक अच्छा शिक्षक अपने हर शिष्य को सर्वश्रेष्ठ ज्ञान उपलब्ध करवाने का प्रयास करता है, जिससे कि उसके शिष्य का भविष्य उज्जवल हो और वो सफलता के नित नये आयाम स्थापित करके जीवन को सही मार्ग पर ले जा सके। किसी भी छात्र के जीवन को सफल बनाने में शिक्षक बहुत ही अहम किरदार निभाता है। शिक्षक अपने छात्र को अच्छी शिक्षा देकर उन्हें देश का अच्छा नागरिक बनाता है। माता पिता के बाद शिक्षक की वजह से ही किसी भी छात्र का भविष्य उज्वल होता है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में माता-पिता के बाद में केवल शिक्षक की ही सबसे अहम महत्वपूर्ण भूमिका होती है। माता-पिता के दिये गये ज्ञान के बाद बच्चों को शिक्षा प्रदान करने में सबसे अहम भूमिका उनका शिक्षक ही निभाता है, इसीलिए किसी भी छात्र के वर्तमान और भविष्य को सफल बनाने में उसके शिक्षक का योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। वैसे तो गुरु-शिष्य की महान परम्परा भारत की संस्कृति का आदिकाल से एक अहम और पवित्र हिस्सा रही है। लेकिन हमारे जीवन में माता-पिता हमारे प्रथम गुरु है, क्योंकि वो ही हमारा इस निराली दुनिया से परिचय करवाते हैं और हमको जीवन जीना सिखाते हैं। इसलिए हमेशा कहा जाता है कि जीवन के सबसे पहले गुरु हमारे माता-पिता होते हैं। भारतीय परम्परा के अनुसार, "एक शिक्षक वो जलता हुआ दीपक है, जो खुद जलकर दूसरों की जिंदगियों में उजाला भर देता है"। एक अच्छा शिक्षक अपना पूरा जीवन अपने छात्रों को अच्छा ज्ञान और सही रास्ता दिखने में लगा देता है। शिक्षक हमेशा हमें सफल होने का रास्ता दिखाते हैं और हमारे चरित्र का सर्वांगीण विकास करके उसका सही ढंग से निर्माण करते हैं। वे हमें जिंदगी में एक जिम्मेदार और अच्छा इंसान बनने में हमारी मदद करते हैं। वो ही हमें जीवन जीने का असली सलीका सिखाते हैं और वो ही हमें अपने जीवन पथ पर ताउम्र सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। जिस तरह से शिक्षक हमें शिक्षा और ज्ञान के जरिए बेहतर इंसान बनने के लिए मेहनत करता है। उस शिक्षक की मेहनत व अनमोल योगदान को सम्मान देने व पहचानने का ही दिन है "शिक्षक दिवस"। इस दिन छात्रों को यह महसूस होना चाहिए कि यही वह दिन है जब हम अपने शिक्षकों के सामने वचन ले कि उनकी कोशिशों को हम जीवन में कभी व्यर्थ नहीं जाने देंगे। छात्रों को यह भी वचन देना होगा कि शिक्षकों ने जो भी हमें सकारात्मक मूल्य सिखाए हैं, हम उनका अपने जीवन में सदैव पालन करेंगे और उनके दिखाये रास्ते पर चलकर देश, परिवार व अपने शिक्षकों का नाम हमेशा रोशन करेंगे।