(दीपक कुमार त्यागी) जल्द तलाशना होगा आर्थिक मोर्चे पर सफलता पाने का मंत्र (लेख )

Posted at : 2019-08-24 04:31:41

(दीपक कुमार त्यागी) भारतीय अर्थव्यवस्था जिस तरह से भी धीरे-धीरे मंदी की तरफ बढ़ रही है वह स्थिति देश के लिए चिंताजनक है। मंदी की मार से बेहाल अर्थव्यवस्था पर अब तो सरकार के अंदर से ही आवाज़े आने लगी हैं। मंदी के चलते भारतीय शेयर बाज़ार लोगों की गाढ़ी कमाई को निगल रहा हैं, रुपया गोते खा रहा है, लोग आयेदिन बेरोजगार हो रहे हैं। लेकिन केंद्र सरकार मंदी की इस बीमारी का सफल इलाज अभी तक नहीं ढूंढ पायी है। सरकार आर्थिक मोर्चे पर सफलता पाने का ठोस मंत्र अभी तक हासिल नहीं कर पायी हैं। मंदी की स्थिति और गम्भीर होने से पहले हालात से निपटने के लिये सरकार को जल्द ही प्रभावी कदम धरातल पर उठाने होंगे। 2016-17 में देश की जीडीपी विकास दर 8.2% थी, जो कि 2018-19 में 5.8% पर पहुंच गई है। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की रिसर्च के मुताबिक 2019-20 की पहली तिमाही में यह और नीचे जाकर 5.6% पर पहुंचने की आशंका है। जो स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि हमारा देश एक युवा देश है जो कि बहुत तेजी के साथ विकसित होने की दिशा में अग्रसर है, लेकिन अगर इसी तरह मंदी की मार चलती रहेगी तो विकास के रथ का पहिया धीमा हो जायेगा और मोदी सरकार अपने फॉइव ट्रिलियन इकनॉमी के लक्ष्य को हासिल करने में पिछड़ जायेगी। वैसे तो देश की अर्थव्यवस्था को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार ने समय-समय पर दावा किया है कि देश की अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत स्थिति में है। लेकिन धरातल पर स्थिति सरकार के दावों के विपरीत है लोग बेरोजगार हो रहे है, व्यापार ठप हो रहे है, कलकारखानों में काम कम होने की वजह से आयेदिन लोगों की नोकरी जा रही है। अब तो स्थिति यह है कि देश के बड़े-बड़े मीडिया हॉउस से भी लोगों को निकाला जा रहा है लेकिन फिर भी कोई मंदी की मार पर देश की जनता को सच्चाई बताने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन अब सरकार के अंदर ही अर्थव्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगने लगे है। , जिस तरह से वरिष्ठ अर्थशास्त्री व नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने देश में मौजूदा आर्थिक गिरावट को "अभूतपूर्व स्थिति" करार देते हुए कहा है कि, "..पिछले 70 सालों में (हमने) तरलता (लिक्विडिटी) को लेकर इस तरह की स्थिति का सामना नहीं किया, जब समूचा वित्तीय क्षेत्र (फाइनेंशियल सेक्टर) आंदोलित है.." नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने यह भी कहा कि सरकार को "..हर वह कदम उठाना चाहिए, जिससे प्राइवेट सेक्टर की चिंताओं में से कुछ को तो दूर किया जा सके.." राजीव कुमार ने कहा, "सरकार बिल्कुल समझती है कि समस्या वित्तीय क्षेत्र में है... तरलता (लिक्विडिटी) इस वक्त दिवालियापन में तब्दील हो रही है.. इसलिए आपको इसे रोकना ही होगा.." लिक्विडिटी की स्थिति पर बोलते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने यह भी कहा, "..कोई भी किसी पर भी भरोसा नहीं कर रहा है... यह स्थिति सिर्फ सरकार और प्राइवेट सेक्टर के बीच नहीं है, बल्कि